होली पर निबंध | | Essay on Happy Holi in Hindi – होली का त्योहार जिसे हम सभी रंगों का त्यौहार के नाम से भी जानते है, हम सभी का बहुत ही प्यारा त्योहार है, जो की रंगों का त्यौहार होली, हिंदुओं के चार बड़े पर्व में से एक है अर्थात होली एक ऐसा रंग-बिरंगा रंगो का त्यौहार है। जिसे हर धर्म के लोग पूरे उत्साह और मस्ती के साथ मनाते हैं।

प्यार भरे रंगों और उमंगों का यह त्यौहार संप्रदाय, जाति धर्म आदि के बंधन खोलकर सभी में भाईचारे का संदेश देता है। इस दिन के अवसर पर सभी लोग अपने पुराने अन-बन, वाद-विवाद को भूलकर गले लगते हैं और एक-दूसरे को गुलाल लगाते हैं। इस त्यौहार पर विशेष रूप से बच्चे और युवाओं को रंगों से खेलते हुए देखना मन को मोह देने वाला त्योहार लगता है।

होली 2021 के त्योहार पर निबंध | Happy Holi Essay in Hindi


रंगों, खुशियों और पकवानों से भरे इस होली के त्योहार को भाईचारे के त्योहार के रूप में भी जाना जाता है| इस दिन लोग अनेक रंगों और मस्ती-ठिठोरीयों के साथ होली के पावन पर्व का आगमन करते है| होली उत्सव के एक दिन पहले होलिका दहन मनाया जाता है जिसमे होलिका को जला कर बुराई पर अच्छाई की जीत के उदाहरण दिया जाते है| इस पावन मौके को लोग अपने परिवार और मित्रो के साथ मनाते है, कहते है होलिका दहन और होली के त्योहार में इतनी ताकत होती है की उस दिन लोग अपनी करवाहट भूल कर खुशियों को गले लगाते है|

होली भारत में मनाये जाने वाला एक खुशियों और रंगों से भरा पर्व है जो हिन्दुओं द्वारा बहुत ही हर्सोल्लास से मनाया जाता है| इस त्योहार को मनाते हुए लोग सरे मन-मुटाव को भूल जाते है, और सह-परिवार इस अनोखे दिन का आगमन करते है| भारत के अलग-अलग जगहों में होली भिन्न-भिन्न तरिकों से मनाई जाती है| कही ‘लठमार होली’ प्रशिद्ध है तो ‘कही फूलोँ से भरी होली’ जग-जाहिर है| सभी लोग अपने मनचाहे तरीके से इस त्योहार की महत्ता को उजागर करते है| यह त्योहार अपने अनेकों रंगों और पकवानों के लिए पुरे विश्व में प्रशिद्ध है|

रंगों का त्यौहार होली | Happy Holi Essay in Hindi


2 दिन तक चलने वाले होली के त्यौहार की तैयारियां कई दिन पहले शुरू हो जाती है. होली से 1 दिन पहली रात को होलिका का दहन किया जाता है। जिसमें लोग नकारात्मक प्रवृत्ति को आहुति देते हैं। रंग एवं गुलाल से खेलते है और होली का एक अलग ही अंदाज में मनोरंजन करते हैं।

होली का पर्व ऋतुराज वसंत के आगमन पर फाल्गुन की पूर्णिमा को आनंद और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इन दिनों रबी की फसल पकने की तैयारी में होती है। फाल्गुन पूर्णिमा के दिन लोग गाते-बजाते, हँसते-हँसाते अपने खेतों पर जाते हैं। वहाँ से वे जौ की सुनहरी बालियाँ तोड़ लाते हैं। जब होली में आग लगती है तब उस अधपके अन्न को उसमें भूनकर एक-दूसरे को बाँटकर गले मिलते हैं।

नन्हें मुन्ने बच्चों के लिए ये त्यौहार बहुत ही खास होता है क्योंकि इस दिन मस्ती करने और खेलने की पूरी छूट होती है। बच्चे एक दूसरे के चेहरे पर रंग लगाते हैं। पिचकारियों में रंग भरकर एक दूसरे पर चलाते हैं। आज कल बाजारों में एक से एक अच्छे डिजाइन की पिचकारियां मिलती हैं जो बच्चों को बहुत ही आकर्षित करती हैं।

फिर दोपहर को होली खेलने के बाद सभी लोग नहाते हैं और अपने चेहरे से रंग छुटाते हैं। घर की महिलायें पकवान बनाती हैं और नहा धोकर लोग पकवान खाते हैं। इस तरह पूरा दिन मस्ती करते बीतता है। होली पर पूरे भारत का रंग ही बदल जाता है।

हिन्दुओं का रंग-बिरंगा त्यौहार | Holi in Hindi

होली हर साल फाल्गुन (मार्च) के महीने में महीने में विभिन्न प्रकार के रगों के साथ मनाई जाती है। सभी घरों में तरह तरह के पकवान बनाये जाते हैं। इस दिन पर हम लोग खासतौर से बने गुजिया, पापड़, हलवा, आदि खाते हैं। होली हिंदुओं के एक प्रमुख त्योहार के रूम में जाना जाता है।

होली का त्योहार लोग आपस में मिलकर, गले लगकर और एक दूसरे को रंग लगाकर मनाते हैं। इस दौरान धार्मिक और फागुन गीत भी गाये जाते हैं। रंग की होली से एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है। होली सिर्फ हिन्दुओं ही नहीं बल्कि सभी समुदाय के लोगों द्वारा उल्लास के साथ मनाया जाता है।

होली कब मनाई जाती हैं | 2021 Me Holi Kab Hai

होली का पर्व ऋतुराज बसंत ऋतु के आगमन पर फाल्गुन मास की पूर्णिमा को आनंद और उल्लास के साथ मनाया जाता है।

इस साल 2021 मे 29 मार्च सोमवार के दिन को होली है 

इस पर्व को प्रतिवर्ष फाल्गुन मास की पूर्णिमा को बनाए जाने के पीछे इसका ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व माना जाता है।

भारत की प्रमुख प्रसिद्ध होलियां | Famous Holi Festival in India in Hindi

भारत के विभिन्न क्षेत्रों में रीति-रिवाज के अनुसार अलग-अलग तरीक़े से विभिन्न त्यौहार मनाये जाते है। इसी प्रकार होली त्यौहार भी अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग रीति-रिवाज से मनाये जाता है और उसे अलग-अलग नाम से पुकारा जाता है। जिनमे से कुछ के नाम इस प्रकार है -

  • वृन्दावन की होली
  • ब्रज की होली
  • काशी की होली
  • बरसाने की होली
  • मथुरा की होली
  • महाराष्ट्र और गुजरात की मटकी फोड़ होली

भारत में होली का उत्सव अलग-अलग प्रदेशों में अलग अलग तरीके से मनाया जाता है। आज भी ब्रज की होली सारे देश के आकर्षण का बिंदु होती है। लठमार होली जो कि बरसाने की है वो भी काफ़ी प्रसिद्ध है। इसमें पुरुष महिलाओं पर रंग डालते हैं और महिलाएँ पुरुषों को लाठियों तथा कपड़े के बनाए गए कोड़ों से मारती हैं। इसी तरह मथुरा और वृंदावन में भी 15 दिनों तक होली का पर्व मनाते हैं।

होली के कई दिनों पहले यह सब शुरू हो जाता है। हरियाणा की धुलंडी में भाभी द्वारा देवर को सताए जाने की प्रथा प्रचलित है। विभिन्न देशों में बसे हुए प्रवासियों तथा धार्मिक संस्थाओं जैसे इस्कॉन या वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में अलग अलग तरीके से होली के शृंगार व उत्सव मनाया जाता है। जिसमें अनेक समानताएँ भी और अनेक भिन्नताएँ हैं।

होली के त्यौहार का ऐतिहासिक महत्व | Holi Festival Historical importance in Hindi

होली के त्यौहार के मनाए जाने के पीछे इसका ऐतिहासिक महत्व है, जो की होलिका दहन की कथा के नाम से प्रसिद्ध है, तो चलिये होली के त्यौहार का ऐतिहासिक महत्व को जानने के लिये होलीका की कथा को जानते है।

होली क्यों मनायी जाती है | Holi Kyo Manaya Jata Hai | HoliKa Dahan Ki Kahani

रंगों का त्यौहार होली से 1 दिन पहले होलिका दहन किया जाता है इसके पीछे एक पौराणिक कथा भी है, जिसे भक्त प्रहलाद और उनकी बुआ होलिका के बारे मे है,

होलिका दहन के संबंध में एक कहानी बहुत ही प्रसिद्ध रही है - प्राचीन काल में हिरण्यकश्यप नाम का एक राक्षस हुआ करता था जिसकी एक दुष्ट बहन भी थी, जिसका नाम होलिका (होलिका को आग से न जलने का वरदान प्राप्त था) था।

हिरण्यकश्यप का एक पुत्र जिसका नाम प्रह्लाद था। जो विष्णु का भक्त था तथा हिरण्यकश्यप स्वयं को भगवान मानता था। वह भगवान विष्णु के कट्टर विरोधी था,  इसलिए वह भक्त प्रहलाद की विष्णु भक्ति के खिलाफ था।

भक्त प्रह्लाद को विष्णु भक्ति करने से रोकने पर भी भक्त प्रह्लाद के ना मानने पर हिरण्यकश्यप ने भक्त प्रहलाद को मारने के लिए बहुत से प्रयास किए लेकिन नाकाम रहा। अंत में हरिण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका से मदद मांगी और उसने हां भर दिया।


भाई के कहे अनुसार होलीका भक्त प्रहलाद को अग्नि में लेकर जलाने हेतु बैठ गई।  होलीका उस आग में पूरी तरह से जलकर राख हो गई लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से भक्त प्रहलाद का कुछ भी नहीं बिगड़ा।

इस प्रकार होलिका दहन बुराई के ऊपर अच्छाई की विजय है। एक अन्य पौराणिक कथा भी मान्य है जिसके अनुसार भगवान श्री कृष्ण ने इसी दिन गोपियों के साथ रासलीला की थी। इसके उपलक्ष में इसी दिन नंद गांव के सभी लोगों ने रंग और गुलाल के साथ खुशियां मनाई थी।

होली का त्यौहार कैसे मनाए | Holi Kaise Manaya Jata Hai

होली पर सभी बहुत अधिक उत्साहित होते हैं। बड़े भी बच्चे बन जाते हैं हम उम्र का चेहरा रंगों से ऐसे रंगते हैं की पहचानना मुश्किल हो जाता है वहीं बड़ों को गुलाल लगा उनका आशिर्वाद लेते हैं। अमीर-गरीब, ऊँच- नीच का भेद भुलाकर सभी आनंद के साथ होली में झूमते नज़र आते हैं।

झूमने का एक अन्य कारण भांग और ठंडाई भी है यह होली पर विशेष कर पीया जाता है। घर की महिलाएं सारे पकवान बना कर जहां दोपहर से होली खेलना प्रारंभ करती है वहीं बच्चे सुबह उठने के साथ ही तहलके (उत्साह) के साथ मैदान में आ जाते हैं।

होली का त्यौहार होली वाले एक दिन पहले से ही शुरू हो जाता है, जिसे उस दिन को होलिका दहन का दिन माना जाता है, और होली के त्योहार का आगमन तो बाजारो के रौनक को देखने से ही पता चल जाता है, लोग होली के लिए जमकर ख़रीदारी करते है, और होली का त्योहार होलिका दहन से शुरू हो जाता है, तो अब होलिका दहन के बारे मे जानते है,

होली दहन की विधि | Holika Dahan ki Vidhi

होली दहन के लिए होली के दिन एक बड़ी डंडी जो की रेड़ का पेड़ होता है, या फिर किसी डंडे मे झंडा किसी सार्वजनिक स्थान पर गाड़ा जाता है। जो की गांवो मे इस पेड़ को बसंत पंचमी के दिन गाड़ा जाता है, लेकिन शहरो मे जगह की कमी होने से इसे होलिका दहन के एक दो दिन पहले गाड़ा जाता है,

इस डंडे की पूजा की जाती है और उसके चारों और फेरे लगाकर मंगलकामनाएं की जाती है। इसके बाद में होली के मुहूर्त पर डंडे को निकालकर इसके चारों ओर उपले और लकड़ियां इकट्ठी की जाती है। पूजा पाठ करने के बाद इन उपले तथा लकड़ियों से होलिका दहन के लिए इसे खूब सजाया जाता है, फिर आधी रात को विधिवत पूजा करके इस होलिका दहन को आग लगाते हैं, बच्चे आस पास खूब पटाखे फोड़ते है, पूरा वातावरण अग्नि की ज्वाला से प्रकाशित हो जाता है,

और फिर सभी लोग खुशिया मनाते है, गाना और कजरी गाते है, और होलिका दहन के रख से एक दूसरे को तिलक लगाते हैं और इसी से लोगों के बीच मिलन और भाईचारे की भावना जागृत होती है। इस तरह होली के त्योहार का शुभारंभ हो जाता है।

होली का महत्व | Holi Ka Mahatva | Importance of Holi in Hindi


होली के पर्व से जुड़े होलिका दहन के दिन, परिवार के सभी सदस्य को उबटन (हल्दी, सरसों व दही का लेप) लगाया जाता है। ऐसी मान्यता है की उस दिन उबटन लगाने से व्यक्ति के सभी रोग दूर हो जाते हैं व गांव के सभी घरों से एक-एक लकड़ी होलिका में जलाने के लिए दी जाती है। आग में लकड़ी जलने के साथ लोगों के सभी विकार भी जल कर नष्ट हो जाते हैं। होली के कोलाहल (शोर) में, शत्रु के भी गले से लग जाने पर सभी अपना बड़ा दिल कर के आपसी रंजिश भूल जाते हैं।

होली से जुड़े कुछ रोचक तथ्य | Happy Holi interesting Fact in Hindi

  • होली अकेला ऐसा त्यौहार है जिसमें कोई किसी की जाति या धर्म नहीं देखता बस सभी होली की मस्ती में डूब जाते हैं
  • होली खेलने का सबसे अच्छा समय सुबह से दोपहर तक का होता है
  • शाहजहाँ के ज़माने में ईद-ए-गुलाबी नाम से होली मनाई जाती थी
  • होली भारत का एक प्रमुख त्योहार है, जिसे रंगों के त्योहार के रूप में भी जाना जाता है।
  • होली का त्योहार भाईचारा लाता है, एक प्रसिद्ध कहावत है, होली के दिन दुश्मन भी दोस्त बन जाते हैं।
  • बच्चे, युवा और बूढ़े लोग रंगों से खेलते हैं और खुशियाँ फैलाते हैं।
  • मथुरा वृंदावन शहर होली के लिए आकर्षण का केंद्र है (लोकप्रिय लठमार होली के रूप में जाना जाता है)
  • रंग महोत्सव “होली” पूरे भारत में सभी धर्मों के लोगों द्वारा मनाया जाता है।
  • भारत में सार्वजनिक अवकाश के रूप में एक होली त्योहार मनाया जाता है।
  • भारत में ही नहीं, भारत का प्रमुख त्योहार होने के नाते, यह पड़ोसी देशों जैसे नेपाल, बांग्लादेश, मलेशिया और दुनिया के अन्य हिस्सों जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, मॉरीशस और भी कई देशों में मनाया जा रहा है।
  • फाल्गुन माह की प्रत्येक वर्ष होली मनाई जाती है।
  • होली मनाने के पीछे का कारण, इस दिन अग्नि से श्री कृष्ण भक्त प्रह्लाद जीवित हो उठे।
  • अकबर के ज़माने में भी खूब होली मनाई जाती थी। मुग़ल काल में महारानी जोधाबाई और अकबर के होली खेलने का वर्णन मिलता है
  • भारत में होली फाल्गुन के महीने में मनाई जाती है। होली का मानना ऋतुराज बसंत के आने का संकेत है
  • होली अकेला त्यौहार है जिसमें बच्चों को मस्ती करने की पूरी छूट होती है
  • रंगों की होली खेलने से एक दिन पहले होलिका जलाना एक विशेष परंपरा है।
  • आम तौर पर होली दो दिन का त्यौहार होता है, भारत के कुछ हिस्सों में इसे एक सप्ताह के लिए मनाया जाता है, पहले दिन होलिका जलाई जाती है, जिसे होलिका दहन (होलिका का भेद) भी कहा जाता है और आगामी दिन हम एक रंगीन होली मनाते हैं ।

उपसंहार {निष्कर्ष} :

होली पर सभी छोटे-बड़े दुकानदार अपने दुकानों के आगे स्टैंड आदि लगा कर विभिन्न प्रकार के चटकीले रंग, गुलाल, पिचकारी व होली के अन्य आकर्षक सामग्री जैसे रंग बिरंगे विग से अपने स्टॉल को भर देते हैं। राशन तथा कपड़ों की दुकानों पर खरीदारी के लिए विशेष भीड़ देखने को मिलती है। पर समय बितने के साथ ज्यादातर लोग अब स्वयं से कोई पकवान नहीं बनाते वे हर प्रकार की मिठाइयां बाजार से ही खरीद लेते हैं। इससे त्योहार की धूम का बाजारीकरण में खो जाने का भय है।

अंत में कहा जा सकता है कि होली एक मेल, एकता, प्रेम, आनंद एवं खुशी का त्योहार है। इसमें हम सभी को छोटे-बड़े {बुजुर्ग}, भाई-बहन, आस-पड़ोस के साथ मिलकर रहने का संकल्प लेना चाहिए। इस दिन छोटे-बड़े के गले मिलकर उन्हें एकता का उदाहरण देना चाहिए। होली खेलते समय अधिकतर लोग रंगों का प्रयोग करते हैं लेकिन हमें उनके स्थान पर गुलाल का प्रयोग करना चाहिए।

रंग आंखों एवं त्वचा के लिए बहुत हानिकारक होता है लेकिन गुलाब का इतना नकारात्मक प्रभाव नहीं होता है और गुलाल से शारीरिक-मानसिक नुकसान नहीं होता है। प्रेम भाव से ही होली खेलनी चाहिए। किसी के साथ जोर जबरदस्ती कर रंग अथवा गुलाल नहीं लगाना चाहिए।

परंपरागत विधि से आज इस त्योहार का स्वरूप बहुत अधिक बदल गया है। पहले लोग होली की मस्ती में अपनी मर्यादा को नहीं भूलते थे। लेकिन आज के समय में त्योहार के नाम पर लोग अनैतिक कार्य कर रहें हैं। जैसे एक-दूसरे के कपड़े-फाड़ देना, जबरदस्ती किसी पर रंग डालना आदि।

होली पर वह भी रंगों से भीग जाते हैं जो अपने घरों से नहीं निकलना चाहते और जैसे की भिगोने वालों का तकिया कलाम बन चुका होता है “बुरा ना मानो होली है”। कुछ लोग त्योहार का गलत फायदा उठा कर बहुत अधिक मादक पदार्थों का सेवन करते हैं और सड़क पर चल रहीं महिलाओं को परेशान करते हैं। यह सरासर गलत व्यवहार है।

जिन लोगों को रंगों से एलर्जी होती है, उन्हें कैमिकल युक्त रंगों से दूर रहना चाहिए। रासायनिक रंगों के उपयोग करने से होने वाले खतरों के बारे में पता होना चाहिए, इसलिए उन्हें हर्बल रंगों का ही उपयोग करना चाहिए। हम तरह तरह के फूलों और तरीकों से भी घर पर ही रंग तैयार कर सकते हैं।

जिन लोगों को रंगों से एलर्जी होती है, उन्हें कैमिकल युक्त रंगों से दूर रहना चाहिए। रासायनिक रंगों के उपयोग करने से होने वाले खतरों के बारे में पता होना चाहिए, इसलिए उन्हें हर्बल रंगों का ही उपयोग करना चाहिए। हम तरह तरह के फूलों और तरीकों से भी घर पर ही रंग तैयार कर सकते हैं।

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